बहुत आसान है बीमार न पड़ना

कदाचित शीर्षक पढ़कर आप चौंक गए होंगे और सोचने लगे होंगे कि भला अपनी इच्छा से बीमार पड़ता ही कौन है? बीमार पड़ते ही नाना प्रकार के जतन करने पड़ते हैं स्वस्थ होने के लिए I टॉनिक, कैप्सूल, गोली, इंजेक्शन, मिक्सचर और भी न जाने क्या – क्या I डॉक्टर के पास दौड़ना और मामला न संभला तो अस्पताल के चक्कर I हजारों के वारे – न्यारे हो जाते हैं केवल जांच करवाने में I अस्पताल का खर्चा अलग जो सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता ही चला जाता है I और कई बार तो जब तक अस्पताल से छुट्टी मिलती है तब तक जेब से पैसों की भी छुट्टी हो जाती है I

ऊपर बताया गया अनुभव उन अधिकांश लोगों का हो सकता है जो बीमार थे या बार – बार बीमार पड़ जाते हैं I कभी जुकाम तो कभी बुखार, कभी फोड़ा तो कभी फुंसी, कभी दस्त तो कभी कब्ज़ I ऐसे लोगों के लिए ही शायद किसी शायर ने फरमाया होगा: 

इक न इक आरज़ा रहा हमको,

थमे दस्त तो बुखार आया I

ऐसे लोगों के जीवन का बहुमूल्य समय चिकित्सकों और अस्पतालों की भागदौड़ में ही बीत जाता है I कभी आप इनसे मिलिये तो वे अपनी दु:ख भरी दास्तान छेड़ देते हैं I सुबह उठ कर दवा की पहली गोली लेने से लेकर रात को सोने के लिए जाने तक उनके जीवन में दवाओं की काफी बड़ी भूमिका होती है I ऐसा नहीं है कि उनकी बीमारी ठीक नहीं हो सकती I पर असली मुद्दा तो यह है कि हम ठीक होना चाहते ही नहीं क्योंकि शायद बीमार होने को ही हम अपनी नियति मान बैठते हैं?

प्राकृतिक चिकित्सा के आचार्य डॉ. विट्ठलदास मोदी अपनी पुस्तक ‘रोगों की सरल चिकित्सा’ के ‘जीवन शक्ति’ वाले अध्याय में लिखते हैं ‘बीमार पड़कर अच्छा होने में जितना बखेड़ा है, उससे बहुत कम बखेड़ा बीमार न पड़ने में है I पर आप कहेंगे कि बीमार पड़ना चाहता कौन है? बीमार न पड़ें, यह क्या हमारे अख़्तियार की बात है? जरूर, सोलह आने आपके वश की बात है, पर उसके लिए यत्न तो करना ही पड़ेगा’ I

तो, बीमार न पड़ने के लिए क्या करना होगा एक स्वाभाविक सा प्रश्न उठता है और उसका उत्तर भी बहुत सरल है I हम प्रकृति में रहते हैं तो यह जरूरी है कि हम प्रकृति के नियमों का यथासंभव पालन करें I जैसे अस्वस्थ होने के लिए प्रकृति के नियमों की अवहेलना एक प्रमुख कारण हो सकता है वैसे ही बीमार न पड़ने के लिए यह जरूरी है कि हम प्रकृति के नियमों का यथाशक्ति पालन करें I प्रकृति के ये कौन से नियम हैं जिनका पालन करना बीमार न पड़ने के लिए आवश्यक है I अच्छी नींद, धूप, हवा, पानी, भोजन, व्यायाम, और सृजनात्मक विचार एवं अच्छी आदतें I अगर हम प्रकृति के इन सरल से नियमों का पालन करेंगे तो हमारे बीमार पड़ने की संभावना न्यूनतम हो जाएंगी I

अच्छी नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है I विशेषज्ञ कहते हैं कि हमें अपनी नींद से कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए I अच्छी नींद न केवल हमारे शरीर को तरोताजा करती है अपितु हमें रोगों से लड़ने की ऊर्जा भी देती है I इसे यूं भी समझ सकते है कि हमारी जीवनी – शक्ति को बढ़ाने में अच्छी नींद का बहुत बड़ा योगदान है I आपने बहुत सारे लोगों को बिस्तर पर करवटें बदलते देखा होगा I बहुत सारा तनाव, उलझन, अवसाद और चिड़चिड़ाहट वे अपने मन पर लादे रहते हैं I परिणामस्वरूप अच्छी नींद उनके लिए एक सपना हो जाती है I ऐसे लोग सुख – सुविधा के सारे साधन जुटा लेते हैं I बढ़िया पलंग, आरामदायक गद्दे, एयर कंडीशनर और भी न जाने क्या – क्या…. पर नींद फिर भी नहीं आती और वे करवटें बदलते रह जाते हैं I नींद न आने पर यही सोचते हैं कि ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’?

अच्छी नींद के लिए जरूरी है मन का हल्का होना I दिन भर की सारी चिंताएँ सोने वाले कमरे के बाहर ही छोड़ दीजिये I बिस्तर पर लेट कर शरीर को ढीला छोड़िए I अपनी श्वास – प्रश्वास पर ध्यान लगाइये… I बस आप कब सो जाएंगे आपको पता भी नहीं चलेगा I हाँ, कुछ सावधानी जरूर रखिए I रात्रि का भोजन सोने से तीन घंटे पहले ही कर लें I रात्रि को सोने का समय दस से साढ़े दस बजे के बीच का रखें I सोने से एक घंटे पहले लैपटॉप, ईमेल, मोबाइल, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम सब बंद कर दें I बिस्तर पर केवल नींद को ही स्थान मिलना चाहिए इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स को नहीं I बिस्तर साफ – सुथरा हो I थोड़ा प्रयास करने से आपको इसका अभ्यास हो जाएगा और आप अच्छी और गहरी नींद सो सकेंगे I ध्यान रखिए, अच्छी नींद का कोई विकल्प नहीं है इसलिए नींद से कभी भी समझौता मत करिए I

इसके बाद अच्छी धूप I यह भी जरूरी है शरीर के लिए I धूप के बहुत सारे फायदे हम जानते हैं फिर भी धूप से बचने की कोशिश करते हैं I यहाँ तक कि अब तो लोग धूप की कमी से होने वाले रोगों से भी पीड़ित होते हुए देखे जा रहे हैं I यकीन मानिए, अच्छी धूप का स्थान कोई नहीं ले सकता है इसलिए जब भी और जहां भी संभव हो धूप का आनंद अवश्य लेना चाहिए I सवेरे की हल्की धूप की किरणों को शरीर पर पड़ने दीजिये I धूप हमारी जीवनी – शक्ति को बढ़ाती है, हमारे मूड को ठीक करती है तथा हमें चैतन्य और सक्रिय बनाती है I जाड़े के दिनों में धूप में बैठने का आनंद तो हम सभी जानते हैं फिर उस आनंद से स्वयं को वंचित मत करिए I घर की खिड़कियाँ और दरवाजे खोल कर धूप के आने का प्रबंध कीजिये I इससे न केवल घर की नकारात्मकता दूर होगी अपितु हमारे विचार भी आशावादी और सकारात्मक होने में मदद मिलेगी I धूप में खुद भी घूमिए, टहलिए और बच्चों को भी धूप में खेलने दीजिये I इससे उनका मन प्रफुल्लित होगा और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा I

हवा का भी हमारे जीवन में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है I पर दुर्भाग्य से हम हवा के महत्त्व को भी नज़रअंदाज़ करते हैं I बजाय गहरी श्वास लेने के हम जल्दी – जल्दी श्वास लेकर खानापूरी करने की कोशिश करते हैं I नतीजा हमारे फेफड़ों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं होता I भारी – भरकम कपड़े पहन कर हम हवा के शरीर से संपर्क को भी रोक देते हैं I खुली हवा में बैठना भी प्रायः हमको पसंद नहीं आता I घर में हवा के आते ही हम दरवाजे, खिड़कियाँ बंद कर देते हैं या उन पर भारी – भरकम मोटे पर्दे डाल देते हैं I शहरों में तो वैसे भी साफ हवा नहीं मिल पाती और जब मिलती भी है तो हमारी अज्ञानता हमारे आड़े आ जाती है I हमें ध्यान रखना चाहिए कि हवा हमारे शरीर के सारे रोम छिद्रों को स्पंदित कर न केवल हमारी जीवनी – शक्ति को बढ़ाती है बल्कि हमारे शरीर को सतेज और प्राणवान बनाती है I छोटे बच्चों को भी साफ हवा में खेलने देना चाहिए I सवेरे पार्क में टहल कर तथा गहरी साँसें लेकर हम शुद्ध वायु का आनंद ले सकते हैं तथा अपने फेफड़ों की क्रियाशीलता तथा कार्यक्षमता को बढ़ा सकते हैं I हमें ध्यान रखना चाहिए कि ये सब प्रकृति के निःशुल्क उपादान हैं इसलिए इनका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए I अन्यथा वह दिन शायद बहुत दूर नहीं है जब शहरों में खुलने वाले ‘ऑक्सीजन बार’ में एक निश्चित धनराशि देकर आप मात्र कुछ मिनटों के लिए ही प्राणवायु ले पाएंगे I

पानी के महत्त्व को तो हम सभी जानते हैं पर कदाचित उससे लाभ उठाना नहीं चाहते I आपको बहुत से ऐसे लोग देखने को मिलेंगे जो पानी से कम से कम संपर्क रखना चाहते हैं I न्यूनतम मात्रा में पानी पीना, न्यूनतम पानी से स्नान करना और हर उस काम से दूरी बनाकर रखना जिसमें पानी का प्रयोग होता हो, ऐसे लोगों की आदत बन जाती है I उदाहरण के लिए खाना खाने के बाद बजाय पानी से हाथ धोने के वे टिशू पेपर से हाथ पोंछना पसंद करते हैं I बजाय दिन में आठ – दस गिलास पानी पीने के वे कोल्ड ड्रिंक, चाय, कॉफी या ऐसी ही अन्य चीजों से काम चलाना ज्यादा अच्छा समझते हैं I बजाय अच्छी तरह से स्नान करने के वे बाथरूम में जाकर स्नान करने की औपचारिकता निभाते हैं I ध्यान रखिए पानी हमारे शरीर को बाहर से और अंदर से अर्थात दोनों तरह से स्वच्छ करता है इसलिए पानी का कोई विकल्प नहीं हो सकता है I शरीर से विजातीय पदार्थों के निष्कासन का कार्य बिना पानी के संभव नहीं है I यदि हम पानी ही नहीं पिएंगे तो निष्कासन का काम भला कैसे संभव होगा? यह विचारणीय है I

ठंडे पानी से स्नान करना अत्यंत आनंददायक होता है I नदी अथवा तालाब के पानी से अथवा कुंए के ताजे पानी से स्नान करने से शरीर में एकदम से स्फूर्ति और सक्रियता आती है I शरीर का रक्तसंचार बढ़ता है और शरीर में लालिमा आ जाती है I वहीं गरम पानी के स्नान से शरीर में शिथिलता और सुस्ती आती है I ठंडे पानी के स्नान से शरीर की जीवनी – शक्ति बढ़ती है और हमारी त्वचा सजीव एवं आभायुक्त हो जाती है I इसलिए हमें पानी से लाभ अवश्य उठाना चाहिए  I

भोजन का भी हमारे जीवन में एक निश्चित स्थान है I प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हमारा भोजन यथासंभव प्राकृतिक होना चाहिए I मौसमी फल, सब्जियाँ, कच्ची सब्जियों का सलाद, अंकुरित अनाज, फलों व सब्जियों के रस आदि इस दृष्टि से सर्वोत्तम आहार कहे जाते हैं I विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हमारा भोजन जितना अधिक विकृत होगा उतना ही अधिक हमारे अस्वस्थ होने की संभावना होगी I

पर आजकल के माहौल में देखें तो सबसे ज्यादा पराभव कदाचित भोजन का ही हुआ है I एक तरफ जंक फूड और फास्ट फूड जैसे खानों ने हमारे आहार की परिभाषा बदल दी है तो दूसरी ओर खाने – पीने की गलत आदतों जैसे – समय – कुसमय खाना, आवश्यकता से अधिक खाना, बिना चबाये हुए खाना, जल्दी – जल्दी खाना, भूख न होते हुए भी खाना, बार – बार खाना, बेमेल भोजन खाना, तनाव की अवस्था में खाना आदि ने भोजन की पूरी संकल्पना को ही परिवर्तित कर दिया है I अब हम बिस्तर पर बैठकर हाथों को धोये बिना टिशू पेपर से पोंछ कर भी खाना खा लेते हैं I दोपहर का खाना शाम को और शाम का खाना देर रात तक लेना भी एक फैशन बन गया है I बीच – बीच में चाय, काफी के बढ़ते प्रयोग ने भी हमें कहीं का नहीं छोड़ा है I शहरों में बड़े – बड़े होटलों में अब आपको बैठने की जगह दिखायी नहीं दे सकती है क्योंकि वहाँ पर खड़े – खड़े खाने का एक नया फैशन चल पड़ा है I और हम आँखें बंद करके बिना गलत और सही की परवाह किए उस फैशन के अंधानुकरण में लगे हुए हैं I

आवश्यकता से अधिक भोजन करने के बाद हम दवाओं की मदद से उसको येन – केन – प्रकारेण पचाने के प्रयास में लग जाते हैं I टी. वी. पर आने वाले विज्ञापन भी हमें इस ओर प्रेरित करते हैं I लगातार ऐसा होने से धीरे – धीरे स्थिति और खराब हो जाती है I अपच और अम्लता के लक्षण दिखाई देने लगते हैं I हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि हमारा आहार ठीक है तो हमें किसी औषधि की आवश्यकता नहीं है और यदि आहार ठीक नहीं है तो कैसी भी औषधि हो, उससे लाभ नहीं मिलेगा I

भोजन को तरह – तरह से चटपटा और स्वादिष्ट बनाने की कोशिश में हम उसे बिगाड़कर उसकी पौष्टिकता से समझौता कर लेते हैं I बीमारी से बचने के लिए हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि भोजन को कम से कम बिगाड़ा जाए I जो चीजें जैसी और जिस रूप में प्रकृति की ओर से उपलब्ध हैं अगर उन्हें वैसा ही उसी रूप में खाया जाए तो हम कहीं अधिक स्वस्थ और सक्रिय रह सकेंगे I इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि अपनी भूख से थोड़ी कम मात्रा में भोजन एक सुनिश्चित समय पर किया जाए I भोजन खूब चबा – चबा कर और पर्याप्त समय देते हुए शांतिपूर्वक बैठकर किया जाए तो अधिक फायदेमंद होगा I सप्ताह में एक दिन रसाहार या फलाहार करने की सलाह भी प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा दी जाती है जिसके अनेक लाभ हैं I यह न केवल पाचन संस्थान को आराम देता है बल्कि शरीर से विजातीय पदार्थों के निष्कासन का मार्ग भी प्रशस्त करता है I

व्यायाम के बिना हमारा स्वास्थ्य अधूरा है I इसलिए यदि हमें बीमार नहीं पड़ना है तो किसी न किसी रूप में व्यायाम को अपनी जीवनचर्या में स्थान देना होगा I प्रातःकाल घूमना, टहलना, योगाभ्यास, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, दौड़ना, जॉगिंग, तैरना, साइकिल चलाना या कोई और व्यायाम या खेलकूद किए जा सकते हैं I ये न केवल आपको चुस्त – दुरुस्त रखेंगे बल्कि रोगों से दूर रखने में भी आपकी मदद करेंगे I पर यह जरूरी है कि व्यायाम में एक नियमितता हो I एक दिन व्यायाम किया और दो दिन छोड़ दिया तो उससे कोई लाभ होने वाला नहीं है I बेहतर होगा कि व्यायाम का समय निर्धारित करके कड़ाई से उसका पालन किया जाए I

नियमित व्यायाम से न केवल शरीर का रक्त – संचार अच्छा रहता है बल्कि मन में अच्छे विचारों का भी उदय होता है I जब मन में सकारात्मकता बढ़ती है तो पूरे शरीर पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है I यदि व्यायाम के साथ – साथ कुछ श्रम भी किया जा सके तो और भी उत्तम होगा I पौधों में पानी देना, क्यारियों की निराई, गुड़ाई करना, बगीचे की सफाई करना, पौधों और लताओं की छंटाई करना जैसे अनेक काम हैं जो समय निकाल कर किए जा सकते हैं I इन कार्यों को करने से आपको जो मानसिक संतुष्टि मिलेगी वह अन्य किसी कार्य को करने से नहीं प्राप्त हो सकेगी I आजकल बहुत से लोग श्रम का तात्पर्य मोबाइल फोन पर की जाने वाली चैटिंग को समझते हैं I पहले कार्य से जहां आनंद की प्राप्ति होती है वहीं दूसरे कार्य से समय तो व्यर्थ होता ही है साथ ही कई बार खीझ तथा झुंझलाहट भी होती है I इसलिए अपनी दिनचर्या तथा समय की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए हमें स्वस्थ रहने के लिए किसी न किसी रूप में व्यायाम तथा श्रम को अपने जीवन में अवश्य स्थान देना चाहिये I

सृजनात्मक विचारों और अच्छी आदतों की हमारे जीवन और विशेषकर स्वास्थ्य – रक्षण में बहुत ही महत्त्वपूर्ण भूमिका है I सृजनात्मक और सकारात्मक विचार हमें आंतरिक शक्ति और ऊर्जा देते हैं, हमारे आत्मविश्वास को दृढ़ बनाते हैं तथा हमारी जीवनी – शक्ति को सबल बनाए रखने में अपना योगदान देते हैं I सृजनात्मक और सकारात्मक विचार हमारे मन में खुशी और उत्साह लाते हैं जो स्वस्थ रहने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं I चिकित्सकों का मानना है कि प्रसन्न व्यक्ति के पास कोई रोग नहीं आ सकता I अगर हम बीमार है तो इसका मतलब यह है कि हमारा मन भी स्वस्थ नहीं है I चिकित्सक कहते हैं कि बीमारियाँ मनोशारीरिक होती हैं अर्थात बीमारी दिखती तो शरीर में है पर उनका कारण मानसिक होता है I सृजनात्मक विचार और अच्छी आदतें हमारे शरीर के साथ – साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी उन्नत करते हैं I मन में सकारात्मकता के आने से हमारा पूरा दृष्टिकोण ही बदल जाता है और धीरे – धीरे रोग से हमारा पीछा छूट जाता है I

तो ये कुछ आसान से सूत्र हैं बीमार न पड़ने के लिए I इनको जीवन में अपनाकर हम न केवल बीमार पड़ने से बच सकते हैं अपितु एक अच्छे स्वास्थ्य के स्वामी भी बन सकते हैं I इन सूत्रों को जीवन में उतारना सरल भी है और ज़रूरी भी क्योंकि यही आगे चलकर आपके स्वास्थ्य की दशा को निर्धारित करते हैं I आप और आपके परिवार का स्वास्थ्य और प्रसन्नता काफी कुछ इन्हीं पर निर्भर करती है I इसी लिए प्रायः प्राकृतिक चिकित्सक कहते हैं कि बीमार न पड़ना बहुत आसान है बनिस्पत बीमार पड़ने के बाद उसका इलाज कराने के I

(आरोग्य, फरवरी, 2021 में प्रकाशित)

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