अगर मैं आपसे पूछूं कि क्या आप ठीक से उठना-बैठना, चलना, लेटना या टहलना जानते हैं तो निश्चित रूप से आप पूछेंगे यह कैसा सवाल है? अरे भाई हम सब लोग ठीक से उठना – बैठना, चलना, घूमना – फिरना जानते हैं । इसमें पूछने की क्या बात है? पर डॉक्टरों का कहना है कि हम गलत हैं । हमारे उठने – बैठने, चलने - फिरने तथा लेटने के तौर – तरीके गलत हैं । उनका तो यह भी कहना है कि हम इन बातों को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं रहते हैं । जहां जैसे चाहें बैठ जाना, लेट जाना, झटके से उठकर खड़े हो जाना, बिस्तर पर लेटकर या सोफे पर लेटकर टीवी देखना या बिस्तर पर बैठकर लैपटॉप पर काम करना, कमर झुका कर बैठना, पैर घसीट कर चलना, कंधे झुका कर चलना आदि ऐसे बहुत से कारण हैं जहां पर अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करते हुए शरीर को आराम देने के हिसाब से हम काम करते हैं जिसका नतीजा अनेकानेक रोगों के रूप में हमारे सामने आता है ।
आपने ऑफिसों में बहुत सारे लोगों को कंप्यूटर पर काम करते हुए देखा होगा । जरा कंप्यूटर टेबल पर उनके बैठने के ढंग को देखिए । वह स्वाभाविक न होकर अपनी सुविधानुसार होता है । कंप्यूटर का मॉनिटर उनकी आंखों की बराबरी पर नहीं होता । कुर्सी की पीठ सीधी नहीं होती । पैरों के नीचे कोई सपोर्ट नहीं होता । कमरे में रोशनी ठीक नहीं होती । इधर – उधर बेतरतीब फैले हुए कागज और फाइलों के ढेर…… कुल मिलाकर कमरे को असहज और काम करने के माहौल को बोझिल बना देते हैं । डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह गलत ढंग के पोस्चर में बैठकर काम करने से हम जल्दी ही पोस्चर से जुड़े हुए रोगों का शिकार हो सकते हैं । पीठ में दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डलोसिस, छाती और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव, पीठ में अकड़न, सिर में दर्द और भारीपन, पीठ में खिंचाव आदि ऐसे ही लक्षण हैं जिनका एक बड़ा कारण हमारा गलत पोस्चर भी है । शरीर को सुविधा और आराम देने के लिए हम इतना चिंतित रहते हैं कि पोस्चर पर ध्यान ही नहीं देते । सोफे पर लेट कर टीवी देखना, बिस्तर पर लेटकर या बैठकर लैपटॉप पर काम करना, बिस्तर पर लेट कर मोबाइल चलाना, कान और कंधे के बीच में सेलफोन को रखकर गर्दन टेढ़ी करते हुए चलना और बातचीत करना । इतना ही नहीं बहुत से लोग तो इसी तरह फोन को रखकर बात करते हुए स्कूटर चलाते हुए भी देखे जा सकते हैं । कहना न होगा कि यह सब आदतें हमारे पोस्चर को बिगाड़ कर धीरे – धीरे हमें हमेशा के लिए बीमार बना देती हैं ।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन सभी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण हमारा गलत पोस्चर और पोस्चर को सही रखने के प्रति हमारी अज्ञानता या लापरवाही है । कई बार हम जानकर भी अपने पोस्चर को ठीक नहीं करना चाहते क्योंकि शायद सही पोस्चर में हमें उतना आराम नहीं मिलता । इसलिए हम टेढ़े – मेढ़े होकर अपनी सहूलियत और आराम के हिसाब से काम करने के लिए अपने शरीर को ढाल लेते हैं । कंप्यूटर पर रोज 8 घंटे काम करने वाले ऑफिस के किसी बाबू से पूछिए । गलत पोस्चर में बैठकर काम करने की वजह से वह जल्दी थक जाता है, आगे झुक कर बैठने से उसकी गर्दन अकड़ जाती है, पीठ सीधी न होने के कारण पीठ में खिंचाव आ जाता है, यही नहीं लगातार मॉनिटर पर काम करने के कारण आंखें भी थक जाती हैं । बहुत दिनों तक यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो वह चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त हो जाता है, भूख कम हो जाती है, कमर में खिंचाव और दर्द हो जाता है, कई बार धुंधला दिखाई देने लगता है और अक्सर सिर में और गर्दन में दर्द रहने लगता है । सिर लटकाकर और कंधों को झुका कर बैठने से गर्दन की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है जो अंततः आपके सिरदर्द का कारण हो सकता है । गलत ढंग से बैठने से मांसपेशियां, जोड़, तथा लिगामेंट्स सभी तनावग्रस्त हो जाते हैं जो कमर में दर्द, कंधों में दर्द या पैरों में दर्द पैदा कर सकते हैं । आप चिकित्सक के पास जाते हैं तो तात्कालिक आराम के लिए आपको कुछ दवा लिख दी जाती हैं । उनसे स्थायी लाभ तो नहीं ही मिलता क्योंकि स्थायी लाभ के लिए समस्या का कारण ढूंढ कर उसकी चिकित्सा करना आवश्यक है ।
इन सबसे बचने के लिए जरूरी है कि हम सही ढंग से बैठना सीखें । सही ढंग से बैठने के लिए अपनी पीठ को सीधा रखें तथा कंधों को पीछे की ओर झुकाएं । कुर्सी के बिल्कुल पीछे की तरफ बैठें । यदि लगातार अधिक देर तक काम करना है तो बीच में थोड़ी देर के लिए उठकर टहल लें । सीधे खड़े होकर हाथों को स्ट्रेच करें और ढीला छोड़ें । ऐसा कई बार कर सकते हैं । गलत पोस्चर न केवल आपकी नींद में व्यवधान डालता है अपितु आपके पाचन तंत्र को भी प्रभावित करता है । आगे झुक कर बैठने और काम करने से पाचन अंगों पर दबाव पड़ता है जिससे पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है । टेबल पर काम करते समय पैरों के नीचे फुट रेस्ट रखें । पैरों को एक दूसरे से क्रॉस करके न बैठें । घुटनों के पिछले हिस्से तथा कुर्सी के बीच में हल्का सा गैप रखें । घुटनों की स्थिति कूल्हों की बराबरी पर या उनसे हल्का सा नीचे हो । एक तरफ झुक कर या रीढ़ की हड्डी को झुका कर न बैठें ।
तो देखा आपने । गलत ढंग से उठने – बैठने, खड़े होने तथा चलने – फिरने के कितने नुकसान हैं? इसलिए कोशिश करें कि उठते – बैठते तथा चलते – फिरते समय आप का पोस्चर सही हो । इससे न केवल आप गलत पोस्चर से जुड़ी हुई समस्याओं से बचे रहेंगे बल्कि अनावश्यक तनाव, थकान और चिड़चिड़ापन भी आपके ऊपर हावी नहीं होंगे क्योंकि कई बार यह सब भी गलत पोस्चर से ही जुड़े हुए होते हैं । इसलिए जरूरी है कि उठने – बैठने के नियमों का गंभीरता से पालन किया जाए और गलत पोस्चर को अपने रहन – सहन और जीवनशैली का अंग न बनाया जाए । सजगता से अपने सही पोस्चर को ध्यान में रखते हुए और उसका पालन करते हुए हम बीमारियों से बच कर अपनी दिनचर्या और जीवनशैली को और अधिक अच्छा और आनंदपूर्ण बना सकते हैं।
(‘आरोग्य’ मार्च, 2022 में प्रकाशित)